मामी की लड़की part 2

 सबसे पहले मामी, फिर उनकी छोटी बेटी, फिर कोमल और आखिर में मैं।


जल्दी ही नींद की गोलियों ने असर दिखाया और वे दोनों बातें करते-करते सो गईं।


अब सिर्फ मैं और कोमल जाग रहे थे।

वह बहुत धीरे-धीरे मुझसे बात कर रही थी।

मुझे पता था कि अब हम कुछ भी करें, कोई नहीं उठेगा।


मैंने धीरे से अपने पैर से उसके पैर सहलाने शुरू किए।

उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, मुझसे बात करती रही।


मैंने एक हाथ उसके सिर के ऊपर से ले जाकर उसके कंधे पर रखा और हल्के-हल्के सहलाने लगा।

उसने मेरी तरफ अपनी कातिलाना नजर डाली और मुस्कुराने लगी।


मेरे हाथों ने अपना कमाल दिखाना शुरू किया।

मैंने धीरे-धीरे अपनी उंगलियाँ उसके गले पर फेरनी शुरू कीं।

उसकी साँसें तेज होने लगीं।

वह बस अपनी निगाहों से मुझे देखे जा रही थी।


जैसे ही मैंने अपना हाथ उसके टॉप के अंदर डाला और उसके बाएँ दुद्धू के निप्पल पर उंगली फेरी, उसे ऐसा लगा जैसे वह किसी खूबसूरत ख्वाब से बाहर आई।

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बाहर करते हुए मम्मी और बहन की तरफ इशारा किया कि वे देख लेंगी।


मैंने उसके होंठों पर उंगली रखी और उसके कान में कहा, “दूसरे कमरे में मेरे पीछे आ जा! बिल्कुल मत डर, ये नहीं उठेंगी। मैंने इन्हें नींद की दवा दी है!”

वह चौंक गई।


लेकिन मेरे जाने के कुछ मिनट बाद वह दूसरे कमरे में मेरे पीछे आई और सवालों की झड़ी लगा दी।



मैंने खड़े-खड़े उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लिया।

पहले तो उसकी आँखें बड़ी हो गईं लेकिन फिर धीरे-धीरे वह हमारी पहली किस के रोमांच में खोने लगी।


साँसें उखड़ने तक हम दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे।


जब हम अलग हुए तो मैंने कहा, “मेरी प्यारी बहना, मैंने सब कुछ आज तुम्हें प्यार करने के लिए किया है! तुम आज अपने इस भाई को प्यार करने का मौका दो। डरने की जरूरत नहीं। मैंने सब सोच-समझकर किया है। तुम बस खुद को मुझे सौंप दो। मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ और जी भरकर प्यार करना चाहता हूँ!”


वह मेरे गले लग गई और बोली, “भैया, मैं भी आपको बहुत पसंद करती हूँ! जब आपने मेरे लिए इतना किया, तो मैं आपको कैसे निराश कर सकती हूँ?”


यह कहकर वह मेरे गाल, माथे, गले पर बेतहाशा चूमने लगी।


फिर हमने एक लंबी स्मूच की।


मैंने उसे बिस्तर पर बैठाया और किस करते हुए उसके दुद्धू को पहले टॉप के ऊपर से दबाने लगा।

फिर मैंने उसका टॉप निकालना शुरू किया, तो उसने साथ दिया।


वह हुस्न की परी मेरे सामने अपनी काली ब्रा में कैद बेशकीमती दुद्धू के साथ बैठी थी।

मैंने फौरन उसके दुद्धू को ब्रा की कैद से आजाद किया और बारी-बारी से उन्हें जमकर चूसा, उसके कड़क निप्पल को दाँतों से हल्के-हल्के भींचकर खींचा।


उसकी सिसकारियों ने माहौल को बहुत रोमांटिक और हॉट बना दिया।


फिर उसे बेड पर लिटाकर मैंने उसके पेट और नाभि को चूमते हुए उसकी गुफा की तरफ बढ़ना शुरू किया।


मैंने उसका पजामा और पैंटी एक साथ निकाल दी।

वह हुस्न की परी मेरे सामने उर्वशी की तरह पूरी तरह कपड़े उतार दिए ।


मैं उसके पैरों को चूमते हुए उसकी गुफा तक पहुँच गया।


उसकी चिकनी, गोरी गुफा, जिस पर एक भी बाल नहीं था, हल्की-हल्की गीली होने की वजह से चमक रही थी, मानो मधुमक्खी के छत्ते से मधु टपक रहा हो।


मैंने उसकी गुफा को चूसना और चाटना शुरू किया।


मेरी मौसेरी बहन के मुँह से तेज सिसकारियाँ निकलने लगीं, “ऊह्ह्ह… मा… ऊम्म… मा… हम्म… हा…”


मैंने जी भरकर उसकी गुफा को चाटा और अपनी जीभ से उसकी गुफा को चूमा।

उसके कामरस का फव्वारा मेरे मुँह पर छूट पड़ा।


फिर मैंने उसे अपने 8 इंची सांप के दर्शन कराए और चूसने को कहा।

उसने बिना नखरे के मेरे सांप को अच्छे से चूसा।


इसके बाद शुरू हुआ हमारी पहली ठुकाई का दौर।


मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था इसलिए मैंने पहले ही सांप पे सेफ्टी पहन लिया।

उसे सीधे लिटाकर मैंने उसके दोनों पैर ऊपर किए जिससे उसकी गुफा खुलकर सामने आ गई।


मैंने अपना सांप उसकी चिकनी गुफा पर रखा।

उसने मेरे सांप को अपनी गुफा के मुँह पर सेट किया और पहले ही झटके में आधा सांप अंदर चला गया।


उसकी चीख निकल गई।


मैं कुछ सेकंड रुका, लेकिन फिर तेजी से झटके मारने शुरू किए।

वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।


उसके दुद्धू को चूसते हुए मैंने अपने झटकों में तेजी बढ़ाई।

कुछ देर में हम दोनों का कामरस बह निकला।


उस रात हमने कई बार अलग-अलग तरह से चुदाई की।

कभी वह नीचे, कभी मैं नीचे।


उसकी गोल, मटकते घड़े को अगले दिन मौका पाकर मारने का वादा मैंने उससे किया।

फिर चार घंटे साथ बिताने के बाद हम चुपचाप वापस आकर उसी तरह लेट गए, जैसे कुछ हुआ ही नहीं।


दोस्तो, यह थी मेरी मामा की बेटी के साथ मेरे पहले सेक्स की सच्ची, सुखद घटना।

आशा करता हूँ कि आपको मेरी बहन की गुफा भेदन की कहानी पसंद आई होगी।

 

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट